सिद्धार्थनगर : धीरेन्द्र नाथ शुक्ला

उत्तर प्रदेश में भारत-नेपाल सीमा के समीप स्थित जिलों में अब जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार ने निर्देश जारी कर कहा है कि सीमा क्षेत्रों में जमीन का पंजीकरण केवल तभी किया जाएगा जब लेन-देने वाले पक्ष के पास स्थिर पहचान संख्या (PAN कार्ड) मौजूद होगी। इससे पहले PAN न होने पर ‘फॉर्म 60’ के माध्यम से भी रजिस्ट्री की अनुमति थी, लेकिन अब यह विकल्प समाप्त कर दिया गया है। राजकीय निर्देश के अनुसार, सीमा से सटे जिलों में अचल संपत्ति की संरक्षित और पारदर्शी खरीद-फरोख्त सुनिश्चित करने के लिए PAN कार्ड को अनिवार्य दस्तावेज बनाया गया है। विभागीय ऑनलाइन पंजीकरण सॉफ़्टवेयर में भी PAN दर्ज करना और उसकी स्वचालित सत्यापन प्रणाली लागू की गई है, जिससे वास्तविक मालिकाना हक और वित्तीय व्यवहार की स्पष्टता सुनिश्चित होगी। सरकार ने यह निर्णय वित्तीय अपराधों पर नियंत्रण, बेनामी सौदों में कमी और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर लिया है। सीमा क्षेत्रों में संपत्ति लेन-देने के समय नकद लेन-देन, गलत जानकारी या अस्पष्ट पहचान को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। PAN आधारित पंजीकरण से संपत्ति का ट्रेस उपलब्ध होगा और सरकारी रिकॉर्ड में सत्यापन भी सुदृढ़ होगा। नियमों के मुख्य प्रावधान PAN कार्ड अनिवार्यः भारत-नेपाल सीमा से सटे जिलों में जमीन की रजिस्ट्री PAN के बिना नहीं हो सकेगी। ‘फॉर्म 60’ विकल्प समाप्तः पहले यह वैकल्पिक दस्तावेज PAN की अनुपस्थिति में स्वीकार्य था, पर अब इसे हटा दिया गया है। ऑनलाइन सत्यापनः रजिस्ट्री विभाग के सॉफ़्टवेयर में PAN दर्ज करने के साथ ही उसका वास्तविकता प्रमाणित किया जाएगा। व्यापारियों और खरीदारों पर प्रभावः जिन व्यक्तियों के पास PAN नहीं है, उन्हें पहले PAN बनवाना होगा, तभी रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी होगी। किन जिलों पर लागू है यह नियम? उत्तर प्रदेश के वे जिले जिन्होंने भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अपनी सीमा तय की है, उन सभी पर यह नया प्रावधान लागू होगा। इसमें मुख्यतः महराजगंज, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी आदि जिलों के इलाके शामिल हैं। सरकार का तर्क राज्य सरकार का कहना है कि इस कदम से न केवल अनियमित और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर रोक लगेगी, बल्कि बेनामी संपत्ति की पहचान और नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सीमा से सटे इलाकों में संपत्ति के अवैध हस्तांतरण, चोरी-छिपे सौदों तथा फर्जी दस्तावेज़ीकरण पर पैनी नजर रखने के लिए PAN आधारित सत्यापन को प्रभावी उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी सूत्रों ने बताया है कि यह नियम तुरंत प्रभावी कर दिया गया है और रजिस्ट्री कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि PAN की सत्यापित एंट्री के बिना किसी भी अचल संपत्ति सौदे को अंतिम रूप न दिया जाए। इस कदम से अपेक्षित है कि सीमा क्षेत्र की संपत्ति बाजार में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और सुरक्षा-सम्बंधी निगरानी मजबूत होगी।